सत्य का अनुसरण कैसे करें (1)
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| सत्य का अनुसरण कैसे करें (1) |
हमने काफी लंबे समय तक इस विषय पर संगति की है कि सत्य का अनुसरण कैसे करें और हमने जिन चीजों पर संगति की है उन सभी में सत्य का अनुसरण करने के तरीके के संबंध में अभ्यास का एक पहलू शामिल है : त्याग देना। यानी, हमारी संगति की सारी विषय-वस्तु उन चीजों के बारे में रही है जिन्हें लोगों को परमेश्वर में विश्वास रखने और सत्य का अनुसरण करने की प्रक्रिया में त्याग देना चाहिए, जो ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें लोगों को अपने जीवन में और उस जीवन पथ पर त्याग देना चाहिए जिस पर वे चलते हैं।
ये वास्तव में कुछ ऐसी चीजें हैं जो लोगों के सत्य के अनुसरण को प्रभावित करती हैं। तो त्याग देने पर हमारी विषय-वस्तु की पहली मद क्या थी? (लोगों की विभिन्न नकारात्मक भावनाओं को त्याग देना।) और दूसरी मद क्या थी? (लोगों के लक्ष्यों, आकांक्षाओं और इच्छाओं को त्याग देना।) त्याग देने पर हमारी विषय-वस्तु की पहली मद विभिन्न नकारात्मक भावनाओं को त्याग देना थी और दूसरी मद लोगों के लक्ष्यों, आकांक्षाओं और इच्छाओं को त्याग देना थी। हर मद में बहुत सारे उप-विषय और विवरण शामिल थे, है ना? (हाँ।) इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस विषय पर संगति कर रहे थे या इस विषय-वस्तु में कौन-सी श्रेणियाँ और मदें थीं और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितनी सारी मिसालें दी गईं या कितनी सारी दशाएँ और समस्याओं के कितने सार उजागर किए गए, संक्षेप में, हमने जिस तमाम विषय-वस्तु पर संगति की, उस में उन विभिन्न समस्याओं का जिक्र किया गया जो लोगों के परमेश्वर में विश्वास रखने और सत्य का अनुसरण करने की प्रक्रिया में या उनके वास्तविक जीवन में आती हैं, साथ ही, इन समस्याओं का सामना करने पर लोगों को अभ्यास के जो मार्ग चुनने चाहिए और जिन सत्य सिद्धांतों उन्हें पालन करना चाहिए, उनका भी उसमें जिक्र किया गया। इन समस्याओं से जुड़े विभिन्न पहलू खोखले नहीं हैं और ये सिर्फ लोगों के विचारों या आध्यात्मिक दुनियाओं में मौजूद नहीं होते हैं। बल्कि वे लोगों के वास्तविक जीवन में मौजूद होते हैं। इसलिए अगर तुम सत्य का अनुसरण करने को तैयार हो, तो चाहे तुम पर किसी भी तरह की समस्या क्यों न आए,
मुझे उम्मीद है कि तुम सत्य की तलाश कर सकोगे और अपने आधार के रूप में लेने के लिए संगत सत्य सिद्धांत ढूँढ सकोगे, अभ्यास का मार्ग खोज सकोगे और इस प्रकार जब भी तुम पर ये समस्याएँ आएँगी, तुम्हारे पास अनुसरण करने का एक मार्ग होगा। इस तमाम विषय-वस्तु पर संगति करने का यह एक मूलभूत उद्देश्य है। हालाँकि हम इन सभी सत्यों पर संगति करना समाप्त कर चुके हैं, लेकिन लोगों को इन सत्य वास्तविकताओं में प्रवेश करने में कुछ समय लगेगा। लोगों को इन सत्यों पर संगति करने से शुरुआत करनी चाहिए और उन्हें विभिन्न सत्य सिद्धांतों को अपने आधार के रूप में लेना चाहिए और साथ ही, सभी प्रकार की चीजों के प्रति अपने दृष्टिकोणों और अपने जीवन के प्रति रवैयों और अस्तित्व के साधनों को बदलना चाहिए। इस तरह, लोग परमेश्वर में विश्वास रखने या जीने और अस्तित्व में रहने की प्रक्रिया में इन सत्य सिद्धांतों को स्वीकार करके, पहले से मौजूद, पुराने और शैतान से निकले अपने विभिन्न भ्रामक विचारों, दृष्टिकोणों या रवैयों और अस्तित्व में रहने के साधनों को बिना महसूस किए बदलने में सफल होंगे और वे अपने भ्रष्ट स्वभावों को छोड़ने में सफल होंगे। इसलिए, ये शब्द जिन पर हमने पहले संगति की थी और वे शब्द जिन पर हम भविष्य में संगति करेंगे, किसी तरह का ज्ञान या किसी तरह का पांडित्य नहीं हैं और वे यकीनन कोई सिद्धांत नहीं हैं। बल्कि उनका उपयोग दैनिक जीवन में लोगों को आने वाली विभिन्न समस्याओं और कठिनाइयों को हल करने में उनका मार्गदर्शन करने, उन्हें निर्देशन देने और उनकी मदद करने के लिए किया जाता है। जब भी तुम्हारे सामने कोई समस्या आती है या जब भी तुम्हारा सामना किसी परिस्थिति, व्यक्ति, घटना या चीज से होता है, तो तुम हमारी संगति की विषय-वस्तु में उन सत्य कसौटियों को तलाश कर सकते हो जिनका तुम्हें पालन करना चाहिए और जिन्हें तुम्हें अभ्यास में लाना चाहिए ताकि तुम अपने भ्रष्ट स्वभावों और अपने पुराने, गलत दृष्टिकोणों के अनुसार अभ्यास करने के बजाय सत्य को अपने आधार और कसौटी के रूप में लेकर कार्य कर सको। परमेश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों का उद्देश्य सत्य का अनुसरण करना होता है, लेकिन सत्य का अनुसरण करने का उद्देश्य लोगों के खाली जीवन को भरना या उनके खाली जीवन को बदलना या उनकी आध्यात्मिक दुनियाओं को समृद्ध करना नहीं है। सत्य का अनुसरण करने का उद्देश्य क्या है? लोगों के लिए यह उद्देश्य बचाए जाने के लिए अपने भ्रष्ट स्वभावों को छोड़ देना है; यकीनन, अपने भ्रष्ट स्वभावों को छोड़ देना परमेश्वर के प्रति समर्पण करने और परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के लिए भी है। लेकिन परमेश्वर के लिए लोगों द्वारा सत्य का अनुसरण करने के उद्देश्य और महत्व इतने साधारण नहीं हैं; यह सिर्फ किसी के बचाए जाने के बारे में नहीं है। बल्कि यह परमेश्वर द्वारा ऐसे व्यक्ति को प्राप्त करने के बारे में है जो अब शैतान के भ्रष्ट स्वभावों से बेवकूफ नहीं बनता है और यकीनन, यह इस प्रकार के व्यक्ति को प्राप्त करने के बारे में भी है जो परमेश्वर के साथ संगत हो सकता है; इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परमेश्वर द्वारा सृजित मानवजाति में से ऐसे व्यक्ति को प्राप्त करने में समर्थ होने के बारे में है जिसे वह चाहता है, जो सभी चीजों का प्रबंधन कर सकता है और सभी चीजों के साथ हमेशा के लिए मौजूद रह सकता है।
यह महत्व बस बचाए जाने जितना सरल नहीं है, जैसा कि यह लोगों के लिए है। इसलिए, चाहे यह लोगों के लिए हो या परमेश्वर के लिए, सत्य का अनुसरण करना बहुत महत्वपूर्ण है। चूँकि यह इतना महत्वपूर्ण है, इसलिए सत्य का अनुसरण करने के संबंध में अभ्यास के एक पहलू—यानी “त्याग देना”—की विषय-वस्तु हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो उद्धार प्राप्ति का अनुसरण करना चाहता है। चूँकि “त्याग देने” का अभ्यास इतना महत्वपूर्ण है, इसलिए “त्याग देने” से संबंधित विभिन्न सत्य सिद्धांत और विभिन्न दशाएँ, भ्रष्ट स्वभावों के खुलासे और “त्याग देने” के अभ्यास से संबंधित भ्रष्ट विचार और दृष्टिकोण जिन्हें उजागर किया जा चुका है ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोगों को अच्छी तरह से समझना चाहिए। जब लोग रोजमर्रा के जीवन में अक्सर प्रकट किए जाने वाले भ्रामक विचारों और दृष्टिकोणों और साथ ही, अपने भ्रष्ट स्वभावों और भ्रष्टता के खुलासों की जाँच करते हैं और उन्हें समझ लेते हैं और इस तरह से खुद को जानने लगते हैं और सत्य के एक पहलू को समझ और स्वीकार लेते हैं और फिर संगत सत्य सिद्धांतों के अनुसार अभ्यास करते हैं, सिर्फ तभी वे सत्य का अनुसरण करने का उद्देश्य हासिल करेंगे। हम इस समय मूल रूप से सत्य का अनुसरण कैसे करें के अंतर्गत “त्याग देने” की दो प्रमुख मदों पर अपनी संगति की समाप्ति पर आ गए हैं। पहली मद क्या थी? लोगों की विभिन्न नकारात्मक भावनाओं को त्याग देना। दूसरी मद क्या थी? लोगों के लक्ष्यों, आकांक्षाओं और इच्छाओं को त्याग देना। हालाँकि हमने इन दो मदों पर अपनी संगति में बहुत सारी विषय-वस्तु पर चर्चा कर ली है, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम्हें इन विषयों से जुड़े हर विशिष्ट सत्य सिद्धांत को समझने की जरूरत है। जब लोग सत्य सिद्धांतों को समझते हैं, सिर्फ तभी वे अपने रोजमर्रा के जीवन में और अपने जीवन मार्ग पर इन सत्य सिद्धांतों के अनुसार आचरण और कार्य कर सकते हैं, धीरे-धीरे सत्य वास्तविकता में प्रवेश कर सकते हैं और सत्य का अनुसरण करने की प्रक्रिया में धीरे-धीरे सत्य समझने और प्राप्त करने के परिणाम हासिल कर सकते हैं।
